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सोमवार, 13 अक्टूबर 2008

गुलामी, अनुवांशिकी और इन्टरनेट

इस बात से शायद हम सभी सहमत हों की हम भारतीय आज भी दास प्रवृति से ग्रसित हैं. ठहरिये, अपने-आप को पुरा दोष ना दीजिये, इस प्रवृति का बुनियादी आधार है विदेशियों का भारत पर पिछले लगभग १००० सालो से राज करना. जेनेटिक्स में अदाप्टेशन नाम का एक सिद्धांत होता है, जिसका मतलब यह होता है की जीव जन्तु वातावरण/परिस्तिथि के अनुसार अपने आप को ढाल लेते हैं समय के साथ. यह बदलाव धीमे धीमे होता है एक लंबे समय तक. इस अनुक्रिया अवधि में इंसान का जेनेटिक कोड भी धीरे धीरे बदलता रहता है जिसका असर पड़ता है परिणाम स्वरुप उसकी आदत / प्रवृति पर. अब इतने लंबे समय तक हम गुलामी में रहे हैं तो लाजमी है आज हम में गुलामी अनुवांशिकी व्यवहार मौजूद है. लेकिन एक आशा कि किरण जरुर मौजूद है आज. वो है इन्टरनेट, जो एक महान इन्कलाब है साबित होगा भारत के लिए. इन्टरनेट में आज़ादी कि महक है और भारतियों को सक्षम बनने का बल. आशा है इन्टरनेट भारत से गुलामी कि बेडियों को तोड़ने में समर्थ होगा इसी कलयुग में. हालाँकि इसे बदलने में वक़्त लगेगा और पीढी दर पीढी निकल जाए इस प्रक्रिया में तो भी आश्चर्य न कीजियेगा क्यों कि यह प्रक्रिया बहुत धीमी होती है.

अब कभी आप शिवराज पाटिल जी को सोनिया जी के आगे शास्टांग प्रणाम करते देखे तो समझ जाईये कि काचर का बीज कौन है.